वक्रतुण्ड दयालु देवा भजन - Vakratund Dayalu Deva Bhajan

Vakratund Dayalu Deva Bhajan - इसमें गजानन यानी गणेश जी की महिमा को वक्रतुण्ड दयालु देवा नामक भजन के माध्यम से बताया गया है।

Vakratund Dayalu Deva Bhajan

वक्रतुण्ड दयालु देवा भजन के बोल - Lyrics of Vakratund Dayalu Deva Bhajan


वक्रतुण्ड दयालु देवा, मंगलकारी नाम।
पहले पूजे जाएँ प्रभु जी, तुमसे हर शुभ काम।।

वक्रतुण्ड दयालु देवा…
जय गणपति श्री गजानन…।।

शिव शंकर के प्यारे नंदन, गौरा माँ के लाल,
मूषक वाहन संग विराजे, तुम हो दीन दयाल।
एकदंत करुणा के सागर, लड्डू जिनको भाय,
भक्त बुलाएँ सच्चे मन से, दौड़े-दौड़े आय।।

वक्रतुण्ड दयालु देवा…

टूटा दाँत महाभारत में, ज्ञान लिखा अपार,
व्यास मुनि की वाणी लिखी, बन गए आधार।
बुद्धि-विद्या के तुम दाता, संकट हरने हार,
रिद्धि-सिद्धि संग बैठे रहते, देते सुख अपार।।

वक्रतुण्ड दयालु देवा…

माथे तिलक चंद्र सा शोभे, गज सा विशाल रूप,
बड़े कान से सुनते जग को, करते कृपा अनूप।
छोटा सा मुख, बड़ी सी सूँड, संदेश यही बताय,
अच्छा सुनो, कम बोलो प्राणी, जीवन सफल बनाय।।


वक्रतुण्ड दयालु देवा…

भादों चतुर्थी दिन शुभ आया, गूँजे घर-घर गान,
मंगल मूर्ति मोरया बोलें, जग करता सम्मान।
दस दिन बाद विदा हों जब भी, आँखों में हो नीर,
“फिर आना गणराज हमारे”, गूँजे हर इक तीर।।

वक्रतुण्ड दयालु देवा, मंगलकारी नाम।
पहले पूजे जाएँ प्रभु जी, तुमसे हर शुभ काम।।

जय गणपति, जय गजानन,
सदा करो कल्याण।।

वक्रतुण्ड दयालु देवा भजन का वीडियो - Video of Vakratund Dayalu Deva Bhajan



सोशल मीडिया पर हमसे जुड़ें (Connect With Us on Social Media)


डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस भजन की समस्त रचनात्मक सामग्री रमेश शर्मा (मंदिरशाला) की मौलिक रचना है। भजन में व्यक्त विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण लेखक के स्वयं के हैं। इस रचना की किसी भी प्रकार की नकल, पुनर्प्रकाशन या व्यावसायिक उपयोग लेखक की लिखित अनुमति के बिना वर्जित है।
Ramesh Sharma

नमस्ते! मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। 📩 किसी भी जानकारी या संपर्क के लिए आप मुझे यहाँ लिख

एक टिप्पणी भेजें

जय श्री श्याम !

और नया पुराने