भगवान श्री कृष्ण के चमत्कारी चरण चिन्ह - Charan Mandir Jaipur

Charan Mandir Jaipur, इसमें जयपुर की नाहरगढ़ पहाड़ी पर मौजूद महाराजा मानसिंह प्रथम द्वारा बनवाए गए श्रीकृष्ण के चरण चिन्ह वाले मंदिर की जानकारी है।


जयपुर की नाहरगढ़ पहाड़ियों के बीच बसा 'श्री चरण मंदिर' केवल एक देवालय नहीं, बल्कि भगवान श्री कृष्ण की साक्षात उपस्थिति का गवाह है। यह वह पावन भूमि है, जहाँ आज भी द्वापर युग के भगवान कृष्ण और उनके साथ आई गायों के चमत्कारी चरण चिन्हों के दर्शन होते हैं।

इस मंदिर का इतिहास आमेर के महाराजा मानसिंह प्रथम से जुड़ा है। किवदंती है कि स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने महाराजा को स्वप्न में दर्शन दिए और 'अम्बिका वन' यानी आज की आमेर की पहाड़ियों पर अपने चरण चिन्ह होने की बात कही। प्रभु की आज्ञा पाकर राजा ने इस स्थान की खोज करवाई और यहाँ परकोटे से घिरे भव्य मंदिर का निर्माण कराया।

श्रीमद्भागवत के 10वें स्कंध में वर्णित एक कथा के अनुसार, एक बार नंद बाबा, श्री कृष्ण और ग्वाल-बाल इसी अम्बिका वन की यात्रा पर थे। तभी एक विशाल अजगर ने नंद बाबा का पैर जकड़ लिया। बाबा की पुकार सुनकर कृष्ण वहां दौड़े आए और अपने दाहिने चरण से उस अजगर को स्पर्श किया।

उस स्पर्श मात्र से वह अजगर अपने देह को त्यागकर एक दिव्य, रूपवान पुरुष बन गया। वह पुरुष और कोई नहीं, बल्कि इंद्रपुत्र विद्याधर 'सुदर्शन' था।


सुदर्शन ने हाथ जोड़कर बताया कि अपने सौंदर्य के अहंकार में उसने अंगिरा गोत्र के ऋषियों का उपहास उड़ाया था, जिसके कारण उसे अजगर बनने का श्राप मिला। लेकिन भगवान के चरणों के स्पर्श ने उसे उस पाप से मुक्त कर दिया। आज भी इस स्थान पर मौजूद चरण चिन्ह उसी महान घटना की याद दिलाते हैं।

मंदिर निर्माण के बाद राजा मानसिंह ने इसे राज-पुरोहितों को भेंट कर दिया। तब से लेकर आज तक, कई पीढ़ियों से पुरोहित परिवार इस बियावान जंगल में रहकर प्रभु की सेवा-पूजा कर रहा है। मान्यता है कि यहाँ के दर्शन मात्र से सुख-संपन्नता आती है और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

आज देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ खिंचे चले आते हैं। यदि आप भी शांति और भक्ति की तलाश में हैं, तो नाहरगढ़ की इन पहाड़ियों में बसे श्री चरण मंदिर के दर्शन अवश्य करें।


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Ramesh Sharma

नमस्ते! मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। 📩 किसी भी जानकारी या संपर्क के लिए आप मुझे यहाँ लिख

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जय श्री श्याम !

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