Kodamdesar Bheruji - इसमें राव बीका द्वारा सती कोडमदे तालाब की पाल पर स्थापित बीकानेर से भी पुराने कोडमदेसर भेरूजी मंदिर के बारे में जानकारी दी गई है।
विक्रम संवत संवत 1465 (1408 ईस्वी) की बात है। राव चूड़ाजी राठौड़ के बेटे अड़कमल राठौड़ का विवाह लाडनू के निवासी माणक राव की पुत्री कोडम दे से तय हुआ, लेकिन कोडमदे ने इस विवाह से इनकार कर दिया।
कोडमदे के इनकार करने के बाद इनका विवाह पूगल के निवासी सादुल सिंह के साथ हुआ। विवाह के बाद पूगल जाते समय बारात वर्तमान कोडमदेसर भेरूजी मंदिर की जगह पर ठहरी हुई थी।
कोडमदे की शादी से नाराज अड़कमल को जब इस बात का पता चला तो उसने सादुल सिंह पर हमला कर दिया जिसमें सादुल सिंह की मौत हो गई।
पति की मौत से दुखी कोडमदे ने अपने सोने के गहने इस जगह पर तालाब खुदवाने के लिए दान दे दिए और खुद अपने पति के साथ सती हो गई। कोडमदे के गहनों और चूड़े से इस जगह तालाब खुदवाया गया।
धीरे-धीरे कोडमदे के नाम पर इस तालाब का नाम कोडमदेसर तालाब और गाँव का नाम कोडमदेसर पड़ गया। बताया जाता है कि यह तालाब बारिश के पानी से भरता है और पूरे साल इसमें पानी जरूर रहता है।
बाद में जब जोधपुर के राव जोधाजी के पुत्र बीकाजी जोधपुर से नया राज्य स्थापित करने इस एरिया में आए तो करणी माता के आदेश से वो कोडमदेसर आए।
यहाँ आकर उन्होंने मंडोर से लाई भेरू जी की मूर्ति को कोडमदेसर तालाब की पाल पर संवत 1522 भादवा सुदी तेरस को पुजारी देदोजी और पंडित सुराजी की देखरेख में विधि विधान से स्थापित करवाया।
बीकाजी पहले बीकानेर नाम के शहर को इस जगह पर ही बसाना चाहते थे लेकिन फिर उन्होंने इस जगह से कई कोस दूर नई जगह पर संवत 1545 (1488 ईस्वी) शनिवार के दिन बीकानेर का किला बनवाकर शहर को बसाया।
इस तरह हम देखते हैं कि कोडमदेसर भेरुजी मंदिर, बीकानेर की स्थापना से भी पहले का है। मंदिर में भेरुजी की मूर्ति इतनी अद्भुत और दैवीय है कि ऐसा लगता है जैसे साक्षात भैरव विराजमान हों।
इस मंदिर में प्रतिमा के ऊपर कोई छत नहीं है यानी मूर्ति खुले आसमान के नीचे एक ऊँचे चबूतरे के ऊपर विराजमान है।
बताते हैं कि मंदिर पर छत बनाने के लिए महाराज गंगा सिंह सहित कई लोगों ने प्रयास किया लेकिन मंदिर की छत नहीं बन पाई, आखिर में इसे भेरुजी की मर्जी मानकर ऐसे ही बिना छत के रहने दिया गया।
मंदिर की सीढ़ियों के पास जहाँ कोडमदेसर सती हुई थी वहाँ पर अब एक सती स्तम्भ लगा हुआ है। आप मंदिर में जाएँ तो इसे जरूर देखें।
तालाब के किनारे पर बीकाजी के समय के महल बने हुए हैं जिन्हें महाराजा गंगा सिंह ने नए सिरे से बनवाया था। मंदिर में चौबीसों घंटे दर्शन चालू रहते हैं।
कोडमदेसर भेरुजी मंदिर कैसे जाएँ?
अगर हम कोडमदेसर भेरुजी मंदिर जाने की बात करें तो यह मंदिर बीकानेर जिले में मौजूद है जिसकी बीकानेर से दूरी लगभग 25 किलोमीटर है।
बीकानेर से कोडमदेसर जाने के लिए आपको जैसलमेर हाईवे पर जाना होगा। बीकानेर से लगभग 18 किलोमीटर दूर कोडमदेसर रोड़ पर राइट टर्न लेना है, इसके बाद लगभग 7 किलोमीटर की दूरी तय करके मंदिर तक जाना है।
मंदिर तक जाने के लिए पक्की सड़क है। आप यहाँ पर अपनी कार या बाइक से जा सकते हैं।
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कोडमदेसर भैरूजी की मैप लोकेशन - Map location of Kodamdesar Bheruji
कोडमदेसर भैरूजी का वीडियो - Video of Kodamdesar Bheruji
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डिस्क्लेमर (Disclaimer)
इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
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