क्या सच में यह हिरण्यकश्यप का किला है? - Is it really Hiranyakashyap Fort?

Is it really Hiranyakashyap Fort? इसमें उदयपुर के जावर एरिया में जस्ते की खदानों के ऊपर पहाड़ों में बने हिरण्यकश्यप के किले के बारे में जानकारी दी है।

Is it really Hiranyakashyap Fort

यह कहानी है राजस्थान के जावर क्षेत्र की। पुराने जावर गाँव में, हिंदुस्तान जिंक की नॉर्थ बारोई खदान के पास एक ऊँची पहाड़ी पर एक बहुत पुराना किला बना हुआ है।

आज यह किला टूट-फूट की हालत में है, लेकिन इसके साथ जुड़ी कहानियाँ आज भी जीवित हैं। स्थानीय लोग इस किले को हिरण्यकश्यप का किला कहते हैं।

गाँव के बुजुर्गों की मान्यता है कि इस किले का संबंध बहुत प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप से रहा है। इसी कारण इस किले से धार्मिक और पौराणिक कथाएँ भी जुड़ी हुई हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, जावर क्षेत्र पर पहले ईडर के राठौड़ राजाओं का शासन था। इन राठौड़ शासकों में एक प्रतापी राजा थे राव हरण सिंह।

माना जाता है कि उन्होंने ही इस किले का निर्माण करवाया था। इसी वजह से इस किले का नाम हरणगढ़ भी बताया जाता है।

इतिहास यह भी बताता है कि राव हरण सिंह का शासन लगभग पंद्रहवीं शताब्दी में था। इससे अनुमान लगाया जाता है कि उसी समय इस किले का निर्माण हुआ या फिर पुराने किले का पुनर्निर्माण किया गया।


किले के पश्चिम दिशा में जो मुख्य द्वार है, वहाँ आज भी हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है। जब आप किले के ऊपर, पूर्वी हिस्से में जाते हैं, तो वहाँ एक मंदिर जैसा कमरा दिखाई देता है।

इस कमरे में सूर्य देव की एक प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जिसे लगभग एक हजार साल पुराना माना जाता है।

चूँकि स्थानीय लोग इस किले को हिरण्यकश्यप से जोड़कर देखते हैं, इसलिए इस सूर्य प्रतिमा को आज भी होलिका के रूप में पूजा जाता है। इसी स्थान पर पास में प्रह्लाद की मूर्ति बताई जाती है।

यहीं पर पूरे इलाके में सबसे पहले होलिका दहन किया जाता है। आज भी इस स्थान का धार्मिक महत्व पूरी तरह बना हुआ है। होलिका दहन और पूजा के समय दूर-दूर से साधु-संत और श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं।

यह किला केवल एक ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का भी एक जीवंत केंद्र है।

हिरण्यकश्यप के किले की मैप लोकेशन - Map location of Hiranyakashyap fort



हिरण्यकश्यप के किले का वीडियो - Video of Hiranyakashyap fort



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
Ramesh Sharma

नमस्ते! मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। 📩 किसी भी जानकारी या संपर्क के लिए आप मुझे यहाँ लिख

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